जीवन, सफलता और प्रेरणा के लिए बाइबिल वचन
यीशु मसीह की शिक्षाएं और परमेश्वर के शक्तिशाली वचन
(1) आलस्य से सावधान [Laziness]
नीतिवचन 6:6-11 : हे आलसी, चींटियों के पास जा; उनके काम पर ध्यान दे और बुद्धिमान हो। उनमें न तो कोई न्यायी होता है, न प्रधान, और न प्रभुता करने वाला, तौभी वे धूपकाल में अपना आहार जुटाती है, और कटनी के समय अपनी भोजनवस्तु बटोरती हैं। हे आलसी, तू कब तक सोता रहेगा? तेरी नींद कब टूटेगी? कुछ और सो लेना, एक और झपकी, थोड़ा और हाथ पर हाथ रखकर लेते रहना, तब तेरा कंगालापन डाकू के समान और तेरी घटी हथियारबंद के समान आ पड़ेगी।
नीतिवचन 19:15 : आलस्य से भारी नींद आ जाती है, और जो प्राणी ढिलाई से काम करता है वह भूखा ही रहता है।
(2) परिश्रम और कर्म [Hard Work]
कुलुस्सियों 3:23 : जो कुछ तुम करते हो, तन मन से करो, यह समझकर कि मनुष्यों के लिये नहीं परन्तु प्रभु के लिये करते हो।
1 कुरिन्थियों 10:31 : इसलिये तुम चाहे खाओ, चाहे पियो, चाहे जो कुछ करो, सब कुछ परमेश्वर की महिमा के लिये करो।
नीतिवचन 10:4 : जो ढीले हाथों से काम करता है वह निर्धन हो जाता है, परन्तु कामकाजी लोग अपने हाथों के कारण धनी होते हैं।
(3) कौशल और निपुणता [Skill]
नीतिवचन 22:29 : क्या तूने ऐसा पुरुष देखा है जो अपने काम में निपुण हो? वह राजाओं के सम्मुख खड़ा न होगा।
(4) दिव्य बुद्धि [Wisdom]
याकूब 1:5 : यदि बुद्धि की कमी हो तो परमेश्वर से माँगो।
(5) प्रार्थना और विश्वास [Prayer & Strength]
यशायाह 40:31 : परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएँगे, वे उकाबों के समान उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकेंगे नहीं।
लूका 18:1 : फिर उसने इसके विषय में कि नित्य प्रार्थना करना और हियाव न छोड़ना चाहिए, उनसे एक दृष्टान्त कहा।
यहोशू 1:9 : क्या मैंने तुझे आज्ञा नहीं दी? हियाव बान्ध और दृढ हो जा, भय न खा, और तेरा मन कच्चा न हो; क्योंकि जहाँ जहाँ तू जाएगा वहाँ वहाँ तेरा परमेश्वर यहोवा तेरे संग रहेगा।
फिलिप्पियों 4:6-7 : चिंता की जगह प्रार्थना करो, और परमेश्वर की शांति तुम्हारे मन की रक्षा करेगी।
मत्ती 21:22 : और जो कुछ तुम प्रार्थना में विश्वास से मांगोगे, वह सब तुम को मिल जाएगा।
भजन संहिता 90:17 : हमारे परमेश्वर यहोवा की प्रसन्नता हम पर बनी रहे; और हमारे हाथों के कामों को हमारे लिये दृढ़ कर; हाँ, हमारे हाथों के कामों को दृढ़ कर।
(6) विश्वास और आशीष [Faith & Blessings]
व्यवस्थाविवरण 28:1-6 :
- यदि तू अपने परमेश्वर यहोवा की बात तन्मन से माने, और उसके सब आज्ञाओं को जो मैं आज तुझे सुनाता हूँ चौकसी से माने, तो तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे पृथ्वी की सब जातियों में ऊंचा करेगा।
- और यदि तू अपने परमेश्वर यहोवा की सुने, तो ये सब आशीर्वाद तुझ पर प्रगट होंगे और तुझे मिलेंगे।
- तू नगर में भी धन्य होगा, और खेत में भी धन्य होगा।
- तेरी संतान, और तेरी भूमि की उपज, और तेरे पशुओं के बच्चे अर्थात गाय-बैलों के बछड़े और भेड़-बकरियों के बच्चे धन्य होंगे।
- तेरी टोकरी और तेरी कठौती दोनों धन्य होगी।
- तू भीतर आते समय धन्य होगा, और बाहर जाते समय भी धन्य होगा।
नीतिवचन 3:5-6 : अपने पूरे मन से परमेश्वर पर भरोसा रख और अपनी समझ का सहारा न लेना। अपनी सब चाल-चलन में उसे मानना, और वह तेरे लिये सीधी राह निकालेगा।
व्यवस्थाविवरण 8:18 : परन्तु अपने परमेश्वर यहोवा को स्मरण रखना, वही है जो तुझे धन प्राप्त करने की सामर्थ्य देता है, इसलिये कि जो वाचा उसने तेरे पितरों से शपथ खाकर बांधी थी उसे आज के दिन पूरा करे।
यशायाह 41:10 : मत डर क्योंकि मैं तेरे संग हूँ, निराश मत हो, क्योंकि मैं तेरा परमेश्वर हूँ; मैं तुझे बल दूंगा और तेरी सहायता करूँगा, और अपने धर्म के दाहिने हाथ से मैं तुझे संतोले रहूँगा।
भजन संहिता 37:5 : अपने मार्ग की चिंता यहोवा पर छोड़ दे, और उस पर भरोसा रख, वही पूरा करेगा।
नीतिवचन 16:3 : अपने काम यहोवा को सौंप दे, और तेरी कल्पनाएं सफल होंगी।
भजन संहिता 23:1 : यहोवा मेरा चरवाहा है, मुझे किसी बात की घटि न होगी।
(7) क्षमाशीलता [Forgiveness]
कुलुस्सियों 3:13 : यदि किसी को किसी पर दोष देने का कोई कारण हो, तो एक दूसरे की सह लो, और एक दूसरे के अपराध क्षमा करो जैसे प्रभु ने तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी करो।
इफिसियों 4:32 : एक दूसरे पर कृपालु और कोमल मन हो, और जैसे परमेश्वर ने मसीह में तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी एक दूसरे के अपराध क्षमा करो।
(8) सच्चा प्रेम और संबंध [Love]
मत्ती 19:6 : सो वे अब दो नहीं, परन्तु एक तन हैं; इसलिये जिसे परमेश्वर ने जोड़ा है, उसे मनुष्य अलग न करें।
1 कुरिन्थियों 13:4-5 : प्रेम धीरजवंत और कृपालु भी है; प्रेम डाह नहीं करता; प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं; वह अनुचित व्यवहार नहीं करता, अपनी भलाई नहीं चाहता, झुंझलाता नहीं, बुराई का लेखा नहीं रखता।
इफिसियों 5:25 : हे पतियों, अपनी अपनी पत्नी से प्रेम रखो, जैसा मसीह ने भी कलीसिया से प्रेम करके अपने आप को उसके लिये दे दिया।
(9) ईमानदारी और सच्चाई [Honesty]
रोमियों 12:1 : इसलिये हे भाइयो, मैं तुमसे परमेश्वर की दया स्मरण दिलाकर विनती करता हूँ, कि अपने शरीरों को जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान करके चढ़ाओ; यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है।
नीतिवचन 11:1 : छल के तराजू से यहोवा को घृणा आती है, परन्तु पूरे बटखरे से वह प्रसन्न होता है।
(10) आंतरिक चरित्र और सुंदरता [Beauty & Character]
1 पतरस 3:3-4 : तुम्हारा श्रृंगार बाहरी न हो... वरन तुम्हारा गुप्त मनुष्यत्व और दीनता और नम्रता की आत्मा की अविनाशी सजावट से सुसज्जित रहे, क्योंकि परमेश्वर की दृष्टि में इसका मूल्य बड़ा है।
1 शमूएल 16:7 : परन्तु यहोवा ने शमूएल से कहा, 'न तो उसके रूप पर दृष्टि कर और न उसके कद की ऊंचाई पर... क्योंकि यहोवा का देखना मनुष्य सा नहीं है, मनुष्य तो बाहर का रूप देखता है, परन्तु यहोवा की दृष्टि मन पर रहती है।'
(11) धन और समृद्धि [Wealth & Prosperity]
नीतिवचन 21:20 : बुद्धिमान के घर में उत्तम धन और तेल पाए जाते हैं, परन्तु मूर्ख उन को उड़ा डालता है।
व्यवस्थाविवरण 8:18 : परन्तु तू अपने परमेश्वर यहोवा को स्मरण रखना, वही है जो तुझे संपत्ति प्राप्त करने की शक्ति देता है।
यीशु मसीह के इन वचनों को अपने जीवन में अपनाएं और परमेश्वर की महिमा के साथ आगे बढ़ें!